जीवन मंत्र डेस्क। गुरुवार, 31 अक्टूबर को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है, इसे विनायकी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं अपने घर-परिवार की सुख-शांति के लिए व्रत करती है। चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश का पूजन किया जाता है। उज्जैन के भागवत कथाकार पं. मनीष शर्मा के अनुसार चतुर्थी पर गणेश पूजा में दूर्वा विशेष रूप से चढ़ानी चाहिए।
- गणेशजी को दूर्वा खास तरीके से चढ़ाई जाती है। दूर्वा का जोड़ा बनाकर अर्पित किया जाता है। 22 दूर्वा को एक साथ जोड़ने पर 11 जोड़े तैयार हो जाते हैं। इन 11 जोड़ों को गणेशजी को चढ़ाना चाहिए।
- पूजा के लिए किसी मंदिर के बगीचे में उगी हुई या किसी साफ जगह पर उगी हुई दूर्वा ही लेना चाहिए। जिस जगह गंदा पानी बहकर आता हो, वहां की दूर्वा भूलकर भी न लें।
- दूर्वा चढ़ाने से पहले साफ पानी से इसे धो लेना चाहिए। दूर्वा चढ़ाते समय गणेशजी के 11 मंत्रों का जाप करना चाहिए। ये मंत्र हैं...
ऊँ गं गणपतेय नम:,ऊँ गणाधिपाय नमः,ऊँ उमापुत्राय नमः,ऊँ विघ्ननाशनाय नमः,ऊँ विनायकाय नमः,ऊँ ईशपुत्राय नमः,ऊँ सर्वसिद्धिप्रदाय नमः,ऊँएकदन्ताय नमः,ऊँ इभवक्त्राय नमः,ऊँ मूषकवाहनाय नमः,ऊँ कुमारगुरवे नमः
- इन मंत्रों का जाप करते हुए श्री गणेश को दूर्वा के 11 जोड़े चढ़ाना चाहिए।
- अगर ये 11 मंत्र बोलने में कठिनाई हो तो यह कहते हुए दूर्वा अर्पित करें।
श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि।
गणेश जी को अर्पित की जाने वाली दूर्वा
- अगर आप इस मंत्र का भी जाप नहीं कर पा रहे हैं तो पूरी श्रद्धा के साथ गणेशजी के नाम का जाप करते हुए दूर्वा की 3, 5 या 11 गांठ भी चढ़ा सकते हैं।
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source https://www.bhaskar.com/religion/dharam/ganesh-puja-tips-ganesh-chaturthi-2019-ganesh-mantra-for-worship-importance-of-durva-in-01674751.html
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