जीवन मंत्र डेस्क. कार्तिक माह में भी सूर्य पूजा का अपना महत्व है। ग्रंथों के अनुसार इस महीने सूर्य को धाता रूप में पूजना चाहिए।रविवार को सप्तमी तिथि होने से भानु सप्तमी का योग बनता है, लेकिन कार्तिक माह में छठ पूजा के अगले दिन ऐसा संयोग कम ही बनता है। इस बार ये संयोग कार्तिक माह के शुक्लपक्ष की सप्तमी पर यानी3 नवंबर रविवार को बन रहा है। इससे एक दिन पहले सूर्य षष्ठी होने से भानु सप्तमी का महत्व और ज्यादा बढ़ गया है। इससे पहले ऐसा संयोग 25 अक्टूबर 2009 को बना था। जब शनिवार को छठ पूजा थी और रविवार को सप्तमी पर सूर्य को अर्घ्य दिया गया था। अब ऐसा संयोग 14 साल बाद 2033 में बनेगा।
- कैसे करें व्रत और पूजा
- सुबह सूर्योदय से पहले उठें और नहा लें। इसके बाद तांबे के लोटे में शुद्धजल भर लें। उसके साथ ही लोटे में लाल चंदन, लाल फूल, चावल और कुछ गेहूं के दाने भी डाल लें।
- सूर्योदय के समय सूर्य को इस लोटे का जल चढ़ाएं और इसके बादसूर्य को नमस्कार करें। संभव हो तो आदित्य हृदय स्तोत्र का भी पाठ करें।
- सूर्य के सामने ही बैठकर दिनभर बिना नमक का व्रत करने का संकल्प लें।
- संभव हो तो पूरे दिन तांबे के बर्तन का पानी पीएं।
- इसके बाद पूरे दिन व्रत रखें और फलाहर में नमक न खाएं। अगर एक समय भोजन करें तो उसमें नमक का उपयोग न करें।
- सूर्य को अर्घ्य देने के बाद श्रद्धानुसारभोजन, वस्त्र या कोई भी उपयोगी वस्तु दान करें।
- गाय को चारा खिलाएं और अन्य पशु-पक्षियों को भी खाने की कोई वस्तु खिलाएं।
- महत्व
भानु सप्तमी पर सूर्य को जल चढ़ाने से बुद्धि का विकास होता है और मानसिक शांति मिलती है और वह व्यक्ति कभी भी अंधा ,दरिद्र, दुखी नहीं रहता। सूर्य की पूजा करने से मनुष्य के सब रोग दूर हो जाते हैं। भानु सप्तमी के दिन दान करने से पुण्य बढ़ता है और लक्ष्मीजी भी प्रसन्न होती हैं।पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यह व्रत करने से पिता और पुत्र में प्रेम बना रहता है। इस दिन दीपदान का विशेष महत्व है और अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों और ब्राह्मणों को दान देना चाहिए।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
source https://www.bhaskar.com/religion/dharam/todays-bhanu-saptami-2019-tithi-and-vaar-shubh-sanyog-on-bhanu-saptami-2019-01677773.html
0 comments:
Post a Comment