जीवन मंत्र डेस्क। शनिवार, 30 नवंबर को गणेश चतुर्थी है। इस तिथि पर गणपति भगवान के लिए व्रत किया जाता है। शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्र दर्शन और पूजन करते हैं और फिर गणेशजी की पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार सुख-समृद्धि के दाता भगवान गणेश की पूजा में उनके 12 नाम मंत्रों का जाप करना चाहिए। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए।
- पूजा में बोलना चाहिए गणेशजी के ये 12 नाम मंत्र
भगवान को दूर्वा चढ़ाएं और मंत्रों का जाप करें। मंत्र- ऊँ गणाधिपतयै नम:, ऊँ उमापुत्राय नम:, ऊँ विघ्ननाशनाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ ईशपुत्राय नम:, ऊँ सर्वसिद्धप्रदाय नम:, ऊँ एकदन्ताय नम:, ऊँ इभवक्त्राय नम:, ऊँ मूषकवाहनाय नम:, ऊँ कुमारगुरवे नम:।
- इस तरह कर सकते हैं गणेशजी की पूजा
गणेश चतुर्थी की सुबह जल्दी उठें, स्नान के बाद सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को जनेऊ पहनाएं। अबीर, गुलाल, चंदन, सिंदूर, इत्र आदि चढ़ाएं। पूजा का धागा, वस्त्र अर्पित करें। चावल चढ़ाएं।गणेशजी के मंत्र बोलते हुए दूर्वा चढ़ाएं। लड्डुओं का भोग लगाएं। कर्पूर से भगवान श्रीगणेश की आरती करें। पूजा के बाद प्रसाद अन्य भक्तों को बांटें। अगर संभव हो सके तो घर में ब्राह्मणों को भोजन कराएं। दक्षिणा दें।
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https://www.bhaskar.com/religion/jeevan-mantra/news/ganeshji-chaturthi-on-30th-november-offer-durva-to-lord-ganesha-importance-of-mantra-chanting-126151090.html
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