जीवन मंत्र डेस्क. पापनाशक शुक्ल पक्ष की षष्ठी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से समस्त तरह के लाभ होते हैं। इस बार यह षष्ठी 31 दिसंबर को मनाई जाएगी। हालांकि यह त्योहार दक्षिण भारत में प्रमुख रूप से मनाया जाता है, लेकिन भगवान भोलेनाथ और मां स्कंदमाता यानी पार्वती की पूजा पूरे देश में होने से इस दिन सभी मंदिरों में भगवान कार्तिकेय की पूजा भी होगी। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है, क्योंकि इस तिथि को कुमार कार्तिकेय ने तारकासुर नामक राक्षस का वध किया था। यह षष्ठी महीने में एक बार आती है।
- धनुर्मास होने से खास रहेगा ये व्रत
धनुर्मास के दौरान यानी जब सूर्य धनु राशि में होता है तब भगवान अयप्पा की विशेष पूजा की जाती है। भगवान अयप्पा को कार्तिक स्वामी का ही रूप माना गया है। मलयालम कैलेंडर के अनुसार जब सूर्य वृश्चिक राशि में होता है तब वृश्चिक मास के पहले दिन से ही इनकी पूजा शुरू हो जाती है। अयप्पा मंदिर सबरीमाला में मंडला पूजा और मकर विलक्कू दो सबसे प्रसिद्ध कार्यक्रम भी इन दिनों में ही मनाए जाते हैं। इसलिए पौष माह के शुक्लपक्ष में आने वाला ये स्कंद षष्ठी व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण है।
- क्यों कहा जाता है स्कंद षष्ठी
दरअसल मां दुर्गा के 5वें स्वरूप स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में जाना जाता है। वैसे तो नवरात्रि के 5वें दिन स्कंदमाता का पूजन करने का विधान है। इसके अलावा इस षष्ठी को चम्पा षष्ठी भी कहते हैं, क्योंकि भगवान कार्तिकेय को सुब्रह्मण्यम के नाम भी पुकारते हैं और उनका प्रिय पुष्प चम्पा है।
- पूजा और व्रत के नियम
स्कंद षष्ठी पर भगवान शिव और पार्वती की पूजा की जाती है। मंदिरों में विशेष पूजा की जाती है। इसमें स्कंद देव (कार्तिकेय) की स्थापना और पूजा होती है। अखंड दीपक भी जलाए जाते हैं। भगवान को स्नान करवाया जाता है। भगवान को भोग लगाते हैं। इस दिन विशेष कार्य की सिद्धि के लिए कि गई पूजा-अर्चना फलदायी होती है। इस दिन मांस, शराब, प्याज, लहसुन का त्याग करना चाहिए। ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी होता है। पूरे दिन संयम से भी रहना होता है।
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source https://www.bhaskar.com/religion/dharam/news/skanda-shashti-on-31-december-this-fast-of-lord-kartikeya-will-be-special-due-to-pausha-month-and-sagittarius-126399485.html
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