- प्रचलित कथा के अनुसार ईसा मसीह अपने शिष्यों के साथ एक गांव से दूसरे गांव जा रहे थे। लंबे सफर की वजह से शिष्यों को भूख लग रही थी। सभी ने प्रभु यीशु से खाना खाने की इच्छा व्यक्त की। ईसा मसीह भी मान गए। शिष्यों ने जब खाना देखा तो वह बहुत कम था। तब प्रभु यीशु ने शिष्यों से कहा कि तुम्हारे पास जो कुछ भी है, वह सब इकट्ठा करके मिल-बांटकर खाओ।
- प्रभु यीशु की बात मानकर सभी शिष्यों ने खाना इकट्ठा किया। तभी वहां एक और भूखा व्यक्ति आ गया। उसने भी खाने की इच्छा जाहिर की। शिष्यों ने उसे भी अपने साथ बैठा लिया और मिल-बांटकर खाना शुरू कर दिया।
- खाना कम था, लेकिन सभी का पेट भर गया और भूख शांत हो गई। खाने के बाद सभी हैरान थे कि इतने कम खाने में हमें संतुष्टी कैसे मिल गई। उन्होंने प्रभु यीथु से इसका कारण पूछा।
- ईसा मसीह ने कहा कि जो लोग खुद से पहले दूसरों के बारे में सोचते हैं, वे अभावों में भी संतुष्टी प्राप्त कर लेते हैं। तुम सभी ने खुद से ज्यादा दूसरों की भूख के बारे में सोचा, इसी वजह से थोड़ा सा खाना भी तुम लोगों के लिए पर्याप्त हो गया। जो लोग जोड़ते हैं, संचय करते हैं, वे हमेशा सुखी और शांत रहते हैं।
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source https://www.bhaskar.com/religion/jeevan-mantra/news/christmas-2019-25-december-2019-motivational-story-of-jesus-inspirational-story-of-jesus-prerak-prasang-of-jesus-126370157.html
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