जीवन मंत्र डेस्क। 26 दिसंबर को सूर्य ग्रहण है। ग्रहण के संबंध में शास्त्रों में कई कथाएं बताई गई हैं। महाभारत युद्ध में भी सूर्य ग्रहण हुआ था। इस ग्रहण की वजह से अर्जुन ने जयद्रथ का वध कर दिया था। जानिए ये कथा...
- जयद्रथ ने किया द्रौपदी का हरण
महाभारत में जयद्रथ सिंधु देश का राजा था। उसका विवाह कौरवों की बहन दु:शला से हुआ था। जब पांडव 12 वर्ष के वनवास पर थे, तब एक दिन जयद्रथ उसी जंगल में गुजरा, जहां पांडव रह रहे थे। उस समय आश्रम में द्रौपदी को अकेला देख जयद्रथ ने उसका हरण कर लिया। जब पांडवों को ये बात मालूम हुई तो जयद्रथ को बंदी बना लिया। भीम जयद्रथ का वध करना चाहते थे, लेकिन कौरवों की बहन दु:शला का पति होने के कारण अर्जुन ने उन्हें रोक दिया। गुस्से में आकर भीम ने जयद्रथ के बाल मूंडकर पांच चोटियां रख दी। जयद्रथ की ऐसी हालत देखकर युधिष्ठिर को उस पर दया आ गई और उन्होंने जयद्रथ को मुक्त कर दिया।
- पांडवों से बदला लेने के लिए की तपस्या
पांडवों से अपमानित होने के बाद जयद्रथ अपने राज्य नहीं गया और हरिद्वार में शिवजी को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी प्रकट हुए और वरदान मांगने के लिए कहा। जयद्रथ ने भगवान शिव से युद्ध में पांडवों को जीतने का वरदान मांगा। तब भगवान शिव ने जयद्रथ से कहा कि पांडवों से जीतना या उन्हें मारना किसी के भी बस में नहीं है। लेकिन युद्ध में केवल एक दिन तुम अर्जुन को छोड़ शेष चार पांडवों को युद्ध में पीछे हटा सकते हो, क्योंकि अर्जुन स्वयं भगवान नर का अवतार है इसलिए उन पर तुम्हारा वश नहीं चलेगा। ऐसा कहकर भगवान शंकर अंतर्धान हो गए और जयद्रथ अपने राज्य में लौट गया।
- युद्ध में जयद्रथ की वजह से हुई अभिमन्यु की मृत्यु
युद्ध में द्रोणाचार्य ने युधिष्ठिर को बंदी बनाने के लिए चक्रव्यूह की रचना की। इस व्यूह के मुख्य द्वार पर जयद्रथ को नियुक्त किया। योजना के अनुसार कुछ योद्धा अर्जुन को युद्ध के लिए दूर ले गए। जब युधिष्ठिर ने देखा कि चक्रव्यूह के कारण उनके सैनिक मारे जा रहे हैं तो उन्होंने अभिमन्यु से इस व्यूह को तोड़ने के लिए कहा। अभिमन्यु ने कहा कि- मुझे इस व्यूह में प्रवेश करना तो आता है, लेकिन इससे बाहर निकलने का उपाय मुझे नहीं पता। तब युधिष्ठिर और भीम ने अभिमन्यु को विश्वास दिलाया कि तुम जिस स्थान से व्यूह भंग करोगे, हम भी उसी स्थान से व्यूह में प्रवेश कर जाएंगे और व्यूह को तोड़ देंगे। ये बात मानकर अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदकर उस में प्रवेश कर गया, लेकिन महादेव के वरदान से जयद्रथ ने युधिष्ठिर, भीम, नकुल और सहदेव को बाहर ही रोक दिया। चक्रव्यूह में फंसकर अभिमन्यु की मृत्यु हो गई।
- जयद्रथ वध के लिए श्रीकृष्ण ने माया से कर दिया था ग्रहण
जब अर्जुन को पता चला कि अभिमन्यु की मृत्यु का कारण जयद्रथ है तो उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि कल मैं जयद्रथ का वध कर दूंगा या स्वयं अग्नि समाधि ले लूंगा। जयद्रथ की रक्षा के लिए गुरु द्रोणाचार्य ने अगले दिन चक्र शकटव्यूह की रचना की। शाम तक युद्ध करने के बाद भी अर्जुन जयद्रथ तक नहीं पहुंच पाया, क्योंकि उसकी रक्षा कर्ण, अश्वत्थामा, भूरिश्रवा, शल्य जैसे यौद्धा कर रहे थे। श्रीकृष्ण ने देखा कि सूर्य अस्त होने वाला है, तब उन्होंने अपनी माया से सूर्य ग्रहण कर दिया। सभी को लगा कि सूर्य अस्त हो गया है। यह देखकर जयद्रथ असावधान हो गया। जयद्रथ स्वयं अर्जुन के सामने आ गया और उससे अग्नि समाधि लेने के लिए कहने लगा। तब श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि तुरंत जयद्रथ का वध कर दो।
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को एक गुप्त बात बताई कि जयद्रथ के पिता वृद्धक्षत्र ने उसे वरदान दिया है कि जो भी वीर इसका सिर पृथ्वी पर गिराएगा, उसके मस्तक के भी सौ टुकड़े हो जाएंगे। इसलिए तुम इस प्रकार बाण चलाओ कि जयद्रथ का मस्तक कट कर उसके पिता की गोद में गिरे। अर्जुन ने अमोघ बाण चलाकर जयद्रथ का मस्तक काट दिया, यह मस्तक सीधे उसके पिता वृद्धक्षत्र की गोद में जाकर गिरा। जैसे ही उन्होंने जयद्रथ का मस्तक पृथ्वी पर गिराया, उनके मस्तक के सौ टुकड़े हो गए। इस प्रकार अर्जुन ने जब जयद्रथ का वध कर दिया।
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https://www.bhaskar.com/religion/jeevan-mantra/news/mahabharata-surya-grahan-jayadrath-and-arjun-lord-krishna-and-arjun-surya-grahan-2019-solar-eclipse-2019-126378316.html
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