महाराष्ट्र के मुंबई-गोवा नेशनल हाईवे 17 के बीच रत्नागिरी जिले में पिथे परशुराम नाम का छोटा गांव हैं। ये चिपलुन से करीब 10 किमी दूर है। इस गांव को भगवान परशुराम का गांव कहते हैं। बताया जाता है कि यह वही जगह है जहां समंदर को पीछे करने के लिए भगवान परशुराम ने अपना फरसा फेंका था।
- आज यहां करीब 300 साल पुराना भगवान परशुराम का मंदिर है। जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण ब्रह्मेन्द्र स्वामी ने किया था। इस मंदिर के ठीक पीछे माता रेणुका का भी मंदिर है। परशुराम मंदिर परिसर में एक हनुमान मंदिर भी है जिसे समर्थ रामदास स्वामी ने बनवाया था।
इस तीर्थ से जुड़ी बातें
- इस गांव के पास 10 किमी की दूरी पर मौजूद चिपलुन को परशुराम की भूमि कहा जाता है।
- ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम ने खुद को गुरु के सामने सच्चा संन्यासी सिद्ध करने के लिए अपनी पूरी भूमि दान कर दी।
- उस वक्त पश्चिमी घाट पर समंदर का पानी चढ़ रहा था। परशुराम ने भगवान वरुण से कोंकण और मालाबार से पानी हटाने कहा, लेकिन वो नहीं माने।
- इस बात से गुस्साए परशुराम ने समंदर पर अपना फरसा फेंका। परशुराम के गुस्से के कारण समुद्र ने अपने को पीछे खींच लिया।
- जहां फरसा गिरा वह स्थान परशुराम ने अपने निवास के लिए चुन लिया। आज यह जगह पिथे परशुराम के नाम से जानी जाती है।
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source https://www.bhaskar.com/jeevan-mantra/dharm/news/300-years-old-lord-parashuram-temple-in-ratnagiri-district-of-maharashtra-its-pithe-parshuram-its-birth-place-of-lord-parashuram-127240826.html
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