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अशोक वाटिका में इंद्र ने सीताजी को दी थी खीर, इससे उन्हें कभी भूख और प्यास नहीं लगी

हिंदू कैलेंडर के अनुसार वैशाख महीने के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को सीता नवमी या जानकी जयंती पर्व मनाया जाता है। जो कि 2 मई शनिवार यानी आज है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार चैत्र महीने के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को श्रीराम का जन्म हुआ। उनके 7 साल बाद वैशाख महीने के शुक्लपक्ष की नवमी को माता सीता प्रकट हुई। ग्रंथों में भेद होने के कारण देश के कुछ हिस्सों में ये पर्व फाल्गुन महीने में भी मनाया जाता है। वाल्मीकि रामायण में माता सीता के पिछले जन्म, विवाह, उम्र और अशोक वाटिका में बीताए समय के बारे में कुछ रोचक बातें बताई गई हैं।

सीता जयंती
सीता जयंती वैशाख महीने के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। लेकिन भारत के कुछ हिस्सों में ये पर्व फाल्गुन महीने के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को भी मनाते हैं। रामायण के अनुसार देवी सीता वैशाख महीने में अवतरित हुई थीं, लेकिन निर्णयसिन्धु के कल्पतरु ग्रंथ के अनुसार फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को। इसलिए दोनों ही तिथियों पर माता जानकी का प्राकट्योत्सव मनाया जाता है।

वाल्मीकि रामायण की माता सीता से जुड़ी बातें

1. वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब राजा जनक यज्ञ के लिए भूमि तैयार कर रहे थे। तब हल से भूमि जोतते हुए उन्हें भूमि से एक कन्या प्राप्त हुई। जोती हुई जमीन और हल की नोक को सीता कहते हैं। इसलिए उसका नाम सीता रखा गया।

2. वाल्मीकि रामायण में बताया है कि वेदवती नाम की स्त्री भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही थी। उसे रावण ने देखा और बाल पकड़कर अपने साथ ले जाने लगा। तब उस तपस्वी स्त्री ने श्राप दिया कि स्त्री के कारण ही तेरी मृत्यु होगी और वो अग्नि में समा गई। उसी ने देवी सीता के रूप में दूसरा जन्म लिया।

3.वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड में माता सीता ने अपना परिचय दिया। उन्होंने बताया कि विवाह के बाद वे 12 साल तक इक्ष्वाकुवंशी महाराज दशरथ के महल में श्रीराम के साथ रहीं। वनवास जाते समय श्रीराम की आयु 25 और उनकी 18 वर्ष थीं।

4. वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान राम व लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र के साथ मिथिला पहुंचे थे। विश्वामित्र ने ही राजा जनक से श्रीराम को भगवान शिव का धनुष दिखाने के लिए कहा। तब भगवान श्रीराम ने उस धनुष को उठाकर देखना चाहा और प्रत्यंचा चढ़ाते वक्त वह टूट गया। राजा जनक ने सोच रखा था कि जो भी इस शिव धनुष को उठा लेगा, उसी से सीता का विवाह करेंगे। राजा जनक ने राजा दशरथ को बुलावा भेजा और विधि-विधान से श्रीराम-सीता का विवाह करवाया।

5. जब रावण सीता जी का हरण कर अपनी अशोक वाटिका में लाया। उसी रात भगवान ब्रह्मा के कहने पर देवराज इंद्र ने सभी राक्षसों को मोहित कर के सुला दिया। फिर देवी सीता को खीर दी। इसके बाद उन्हें कभी भूख और प्यास नहीं लगी।



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Sita Janaki Navami 2020; Indra Dev Gives Kheer To Janaki Mata In Ashok Vatika; Read Interesting Facts about Mata Sita


source https://www.bhaskar.com/jeevan-mantra/dharm/news/sita-janaki-navami-2020-indra-dev-gives-kheer-to-sita-mata-in-ashok-vatika-interesting-facts-127263335.html
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Milan Tomic

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