महाभारत में देवराज इंद्र ने कर्ण से उसके कुंडल और कवच मांगे तो बदले में एक दिव्य शक्ति कर्ण को दी थी। इंद्र ने कर्ण से कहा था कि इस शक्ति का उपयोग जिस पर भी करोगे, वह अवश्य मर जाएगा, लेकिन इस शक्ति का उपयोग सिर्फ एक बार ही हो सकता है।
कर्ण ने इंद्र द्वारा दी गई दिव्य शक्ति अर्जुन के लिए संभाल कर रख थी। श्रीकृष्ण ये बात जानते थे। इसीलिए उन्होंने युद्ध में भीम के पुत्र घटोत्कच को भेजा। दुर्योधन की ओर से कोई भी योद्धा उसे काबू नहीं कर पा रहा था। तब दुर्योधन ने कर्ण से कहा कि इंद्र द्वारा दी गई शक्ति का उपयोग करो और इस राक्षस को मार डालो, नहीं तो ये पूरी कौरव सेना को आज ही खत्म कर देगा।
कर्ण ने सभी की बात मानते हुए इंद्र के दिव्यास्त्र से घटोत्कच को मार डाला। इससे सभी पांडव दुखी थे, लेकिन उस समय श्रीकृष्ण प्रसन्न दिखाई दे रहे थे। यह देखकर अर्जुन को आश्चर्य हुआ। अर्जुन ने श्रीकृष्ण से पूछा कि भीम का पुत्र मारा गया है, सभी दुखी हैं और आप प्रसन्न क्यों हैं?
इस प्रश्न के जवाब में श्रीकृष्ण ने कहा कि अभी यही दिखाई दे रहा है कि कर्ण ने घटोत्कच को मार दिया है, लेकिन सच ये है कि घटोत्कच ने कर्ण को मार दिया है। इंद्र ने कर्ण से कुंडल और कवच पहले ही ले लिए थे। इसके बाद उसके पास सिर्फ एक ही अजेय शक्ति थी, जिसका उपयोग घटोत्कच के लिए कर लिया। इंद्र की दी हुई शक्ति कर्ण के पास रहती तो उसे जीत पाना किसी के लिए भी संभव नहीं था। ऐसे में पूरी पांडव सेना उसका मुकाबला नहीं कर पाती। अब कर्ण के पास कोई दिव्य शक्ति नहीं बची है और अब युद्ध में उसे पराजित करना संभव है। कर्ण को पराजित किए बिना ये युद्ध जीत पाना संभव नहीं था।
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source https://www.bhaskar.com/jeevan-mantra/dharm/news/karna-killed-ghatotkacha-mahabharta-facts-arjun-and-krishna-karna-and-arjun-mahabharta-yuddha-127370107.html
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