क्या है स्वाइन फ्लू,स्वाइन फ्लू के लक्षण, ऐसे बचें
स्वाइन फ्लू से पहले और बाद में अगर आप सावधानी रखेंगे तो इस बीमारी से बचा जा सकता है. अगर इस बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो घबराएं नहीं क्योंकि इसका इलाज संभव है.
स्वाइन फ्लू एक बार फिर देश में पांव पसार रहा है, आये दिन देश में इससे होने वाली मौतों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. फ्लू से डरने के बजाय जरूरत इसके लक्षणों के बारे में जानने और सावधानी बरतने की है. आइए जानें स्वाइन फ्लू से जुड़े तमाम पहलुओं के बारे में :
स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है. यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है. 2009 में जो स्वाइन फ्लू हुआ था, उसके मुकाबले इस बार का स्वाइन फ्लू कम पावरफुल है हालांकि उसके वायरस ने इस बार स्ट्रेन बदल लिया है यानी पिछली बार के वायरस से इस बार का वायरस अलग है.
स्वाइन फ्लू (swine flu) मौसमी फ्लू वायरस के कारण होने वाली एक बीमारी हैं | सर्दी के मौसम में इस फ्लू के होने का खतरा दोगुना हो जाता है |
पिछले साल से लेकर अब तक सिर्फ दिल्ली में ही लगभग 400 लोग स्वाइन फ्लू के चपेट में आ चुके है | इनमें से एक घटना हैं दिल्ली में रहने वाली वर्तिका सिन्हा (26) की |
वर्तिका को जब बलगम वाली खांसी होने लगी तो उसने यह बिलकुल नहीं सोचा की उसको स्वाइन फ्लू हो सकता है | “मुझे लगा कि यह खांसी इस ठन्डे मौसम कि वजह से हो रही है | मुझे अंदांज़ा ही नहीं था की मेरी खांसी स्वाइन फ्लू का संकेत हो सकती है,” वर्तिका ने कहाँ |
जब वर्तिका को अचानक से एक दिन 102 बुखार आ गया तब उसके दोस्त ने उसको स्वाइन फ्लू के बारे में बताया और सीताराम भरतिया के Internal Medicine Consultant, डॉ. मयंक उप्पल, को दिखाने की सलाह दी |
स्वाइन फ्लू के लक्षण-
हल्का फ्लू या स्वाइन फ्लू में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, ठंड और कभी-कभी दस्त और उल्टी के साथ आता है. हल्के मामलों में, सांस लेने में परेशानी नहीं होती है. लगातार बढ़ने वाले स्वाइन फ्लू में छाती में दर्द के साथ उपरोक्त लक्षण, श्वसन दर में वृद्धि, रक्त में ऑक्सीजन की कमी, कम रक्तचाप, भ्रम, बदलती मानसिक स्थिति, गंभीर निर्जलीकरण और अंतर्निहित अस्थमा, गुर्दे की विफलता, मधुमेह, दिल की विफलता, एंजाइना या सीओपीडी हो सकता है.'
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि गर्भवती महिलाओं में, फ्लू भ्रूण की मौत सहित अधिक गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है. हल्के-फुल्के मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन गंभीर लक्षण होने पर मरीज को भर्ती करने की आवश्यकता हो सकती है.
उन्होंने कहा है कि सितंबर माह में बेंगलुरू में सकारात्मक एच1एन1 मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है. अक्टूबर के पहले सप्ताह के दौरान 68 सकारात्मक मामले सामने आए थे, जो कुछ ही दिनों में 21 और बढ़ गए. ऐसे में सावधानी सबसे बड़ा उपाय है.
Swine flu symptoms in hindi – क्या है स्वाइन फ्लू के लक्षण
स्वाइन फ्लू से पीड़ित लोग अक्सर निम्नलिखित लक्षणों का सामना करते है –
ज्वर (कभी कभार)
ठण्ड लगना
खांसी और ख़राब गला
नाक का बहना
शरीर या सिर में दर्द
थकावट
उबकाई और उल्टियाँ
स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण ज़्यादातर वायरस के शरीर में प्रवेश करने के 1 से 3 दिन के अंदर-अंदर प्रकट होते है |
“परन्तु स्वाइन फ्लू से पीड़ित सभी लोग इन सभी लक्षणों का सामना करेंगे ऐसा ज़रूरी नहीं ।”
टेस्ट के परिणाम जानने के बाद वर्तिका ने पुछा, “स्वाइन फ्लू के लिए मुझे क्या इलाज अपनाना चाहिए ?”
Swine flu treatment in hindi – कैसे करे स्वाइन फ्लू का इलाज ?
स्वाइन फ्लू ज़्यादातर कोई जानलेवा बीमारी नहीं होती | यह फ्लू उन लोगों के लिए ज़्यादा हानिकारक होता है जो हाई रिस्क श्रेणी में आतें हैं |
यह लोग है –
गर्भवती महिलाएं ख़ास तौर पर जिनका नौवा महीना चल रहा है
बुज़ुर्ग जिनकी उम्र 65 से ज़्यादा है
पांच साल से छोटे शिशु
वह लोग जिनको दीर्घकालिक बीमारियां (chronic medical condition) है जैसे कि अस्थमा, इम्फीसेमा, डायबिटीज और दिल का रोग
“आमतौर पर स्वाइन फ्लू से पीड़ित लोगों को केवल लक्षणों से राहत पाने की दवाइयाँ दी जाती है | यदि किसी को दीर्घकालिक रोग होता है तो उनको वायरस रोधी (antivirals) दी जाती है ताकि उनको जल्द ही लक्षणों से राहत मिल जाए और कोई गंभीर समस्या पैदा ना हो जाए,” डॉ. मयंक ने समझाते हुए कहाँ |
दवाईयों के अलावा आप नीचे दिए गए घरेलू नुस्खों को अपनाकर स्वाइन फ्लू से मुक्त हो सकते है :
अधिकतर समय आराम करें और अपने इम्यून सिस्टम को इस बीमारी से लड़ने दे
ज़्यादा से ज़्यादा पानी और दूसरे तरल पदार्थ जैसे की शरबत पिएं ताकि आपको डिहाइड्रेशन ना हो जाए
ज़्यादा ज्वर और शरीर में दर्द होने पर पेरासिटामोल लें
स्वाइन फ्लू के लक्षणों से राहत पाने के लिए आप अदरक वाली चाय और लहसुन का रस भी पी सकते है |
स्वाइन फ्लू (swine flu in hindi) से बचने के उपचार क्या हैं ?
एक हफ्ते बाद जब वर्तिका की तबियत संभल गई तो वह फिरसे डॉ. मयंक के पास जाँच कराने आई | वर्तिका ने पुछा, “डॉ., यह बीमारी का मौसम हर साल आता है | इस फ्लू से बचने के लिए हम क्या उपचार अपना सकते है ?”
“स्वाइन फ्लू होने का खतरा सबसे ज़्यादा सर्दी के मौसम में होता है इसीलिए इस मौसम आपको सबसे ज़्यादा सावधानी बरतनी चाहिए |”
स्वाइन फ्लू से पहले और बाद में अगर आप सावधानी रखेंगे तो इस बीमारी से बचा जा सकता है. अगर इस बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो घबराएं नहीं क्योंकि इसका इलाज संभव है.
स्वाइन फ्लू एक बार फिर देश में पांव पसार रहा है, आये दिन देश में इससे होने वाली मौतों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. फ्लू से डरने के बजाय जरूरत इसके लक्षणों के बारे में जानने और सावधानी बरतने की है. आइए जानें स्वाइन फ्लू से जुड़े तमाम पहलुओं के बारे में :
स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है. यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है. 2009 में जो स्वाइन फ्लू हुआ था, उसके मुकाबले इस बार का स्वाइन फ्लू कम पावरफुल है हालांकि उसके वायरस ने इस बार स्ट्रेन बदल लिया है यानी पिछली बार के वायरस से इस बार का वायरस अलग है.
स्वाइन फ्लू (swine flu) मौसमी फ्लू वायरस के कारण होने वाली एक बीमारी हैं | सर्दी के मौसम में इस फ्लू के होने का खतरा दोगुना हो जाता है |
पिछले साल से लेकर अब तक सिर्फ दिल्ली में ही लगभग 400 लोग स्वाइन फ्लू के चपेट में आ चुके है | इनमें से एक घटना हैं दिल्ली में रहने वाली वर्तिका सिन्हा (26) की |
वर्तिका को जब बलगम वाली खांसी होने लगी तो उसने यह बिलकुल नहीं सोचा की उसको स्वाइन फ्लू हो सकता है | “मुझे लगा कि यह खांसी इस ठन्डे मौसम कि वजह से हो रही है | मुझे अंदांज़ा ही नहीं था की मेरी खांसी स्वाइन फ्लू का संकेत हो सकती है,” वर्तिका ने कहाँ |
जब वर्तिका को अचानक से एक दिन 102 बुखार आ गया तब उसके दोस्त ने उसको स्वाइन फ्लू के बारे में बताया और सीताराम भरतिया के Internal Medicine Consultant, डॉ. मयंक उप्पल, को दिखाने की सलाह दी |
स्वाइन फ्लू के लक्षण-
हल्का फ्लू या स्वाइन फ्लू में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, ठंड और कभी-कभी दस्त और उल्टी के साथ आता है. हल्के मामलों में, सांस लेने में परेशानी नहीं होती है. लगातार बढ़ने वाले स्वाइन फ्लू में छाती में दर्द के साथ उपरोक्त लक्षण, श्वसन दर में वृद्धि, रक्त में ऑक्सीजन की कमी, कम रक्तचाप, भ्रम, बदलती मानसिक स्थिति, गंभीर निर्जलीकरण और अंतर्निहित अस्थमा, गुर्दे की विफलता, मधुमेह, दिल की विफलता, एंजाइना या सीओपीडी हो सकता है.'
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि गर्भवती महिलाओं में, फ्लू भ्रूण की मौत सहित अधिक गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है. हल्के-फुल्के मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन गंभीर लक्षण होने पर मरीज को भर्ती करने की आवश्यकता हो सकती है.
उन्होंने कहा है कि सितंबर माह में बेंगलुरू में सकारात्मक एच1एन1 मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है. अक्टूबर के पहले सप्ताह के दौरान 68 सकारात्मक मामले सामने आए थे, जो कुछ ही दिनों में 21 और बढ़ गए. ऐसे में सावधानी सबसे बड़ा उपाय है.
Swine flu symptoms in hindi – क्या है स्वाइन फ्लू के लक्षण
स्वाइन फ्लू से पीड़ित लोग अक्सर निम्नलिखित लक्षणों का सामना करते है –
ज्वर (कभी कभार)
ठण्ड लगना
खांसी और ख़राब गला
नाक का बहना
शरीर या सिर में दर्द
थकावट
उबकाई और उल्टियाँ
स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण ज़्यादातर वायरस के शरीर में प्रवेश करने के 1 से 3 दिन के अंदर-अंदर प्रकट होते है |
“परन्तु स्वाइन फ्लू से पीड़ित सभी लोग इन सभी लक्षणों का सामना करेंगे ऐसा ज़रूरी नहीं ।”
टेस्ट के परिणाम जानने के बाद वर्तिका ने पुछा, “स्वाइन फ्लू के लिए मुझे क्या इलाज अपनाना चाहिए ?”
Swine flu treatment in hindi – कैसे करे स्वाइन फ्लू का इलाज ?
स्वाइन फ्लू ज़्यादातर कोई जानलेवा बीमारी नहीं होती | यह फ्लू उन लोगों के लिए ज़्यादा हानिकारक होता है जो हाई रिस्क श्रेणी में आतें हैं |
यह लोग है –
गर्भवती महिलाएं ख़ास तौर पर जिनका नौवा महीना चल रहा है
बुज़ुर्ग जिनकी उम्र 65 से ज़्यादा है
पांच साल से छोटे शिशु
वह लोग जिनको दीर्घकालिक बीमारियां (chronic medical condition) है जैसे कि अस्थमा, इम्फीसेमा, डायबिटीज और दिल का रोग
“आमतौर पर स्वाइन फ्लू से पीड़ित लोगों को केवल लक्षणों से राहत पाने की दवाइयाँ दी जाती है | यदि किसी को दीर्घकालिक रोग होता है तो उनको वायरस रोधी (antivirals) दी जाती है ताकि उनको जल्द ही लक्षणों से राहत मिल जाए और कोई गंभीर समस्या पैदा ना हो जाए,” डॉ. मयंक ने समझाते हुए कहाँ |
दवाईयों के अलावा आप नीचे दिए गए घरेलू नुस्खों को अपनाकर स्वाइन फ्लू से मुक्त हो सकते है :
अधिकतर समय आराम करें और अपने इम्यून सिस्टम को इस बीमारी से लड़ने दे
ज़्यादा से ज़्यादा पानी और दूसरे तरल पदार्थ जैसे की शरबत पिएं ताकि आपको डिहाइड्रेशन ना हो जाए
ज़्यादा ज्वर और शरीर में दर्द होने पर पेरासिटामोल लें
स्वाइन फ्लू के लक्षणों से राहत पाने के लिए आप अदरक वाली चाय और लहसुन का रस भी पी सकते है |
स्वाइन फ्लू (swine flu in hindi) से बचने के उपचार क्या हैं ?
एक हफ्ते बाद जब वर्तिका की तबियत संभल गई तो वह फिरसे डॉ. मयंक के पास जाँच कराने आई | वर्तिका ने पुछा, “डॉ., यह बीमारी का मौसम हर साल आता है | इस फ्लू से बचने के लिए हम क्या उपचार अपना सकते है ?”
“स्वाइन फ्लू होने का खतरा सबसे ज़्यादा सर्दी के मौसम में होता है इसीलिए इस मौसम आपको सबसे ज़्यादा सावधानी बरतनी चाहिए |”


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