हार्ट अटैक क्या है, एवं इसके लक्षण कैसे पहचाने
आजकल अधिकतर लोग हार्ट अटैक की बीमारी से पीड़ित हैं. यूं तो हार्ट अटैक होने से पहले ही इससे जुड़े कई लक्षण दिख जाते हैं. लेकिन अब कई लोगों को अचानक हार्ट अटैक हो रहा है और ये लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है.
हार्ट अटैक कभी भी अचानक अाा सकता हैै, लेकिन कुछ लक्षण हैं, जो हार्ट अटैक के 1 महीने पहले नजर आने लगते हैं। अगर आपको भी नजर आते हैं यह 6 लक्षण तो सावधान हो जाएं, क्योंकि आप हार्ट अटैक के शिकार हो सकते हैं। अभी जानिए इन लक्षणों को, ताकि हार्ट अटैक से बचा जा सके-
6 लक्षण दिखें, तो आने वाला है हार्ट अटैक
1 सीने में असहजता - यह दिल के दौरे के लिए जिम्मेदार लक्षणों में से एक है। सीने में होने वाली किसी भी प्रकार की असहजता आपको दिल के दौरे का शिकार बना सकती है। खास तौर से सीने में दबाव या जलन महसूस होना। इसके अलावा भी अगर आपको सीने में कुछ परिवर्तन या असहजता का अनुभव हो, तो तुरंत अपने चिकित्सक से सलाह लें।
2 थकान - बगैर किसी मेहनत या काम के थकान होना भी हार्ट अटैक की दस्तक हो सकती है। जब हृदय धमनियां कोलेस्ट्रॉल के कारण बंद या संकुचित हो जाती हैं, तब दिल को अधिक मेहनत करने की आवश्यकता होती है, जिससे जल्द ही थकान महसूस होने लगती है। ऐसी स्थिति में कई बार रात में अच्छी खासी नींद लेने के बाद भी आप आलस और थकान का अनुभव करते हैं, और आपको दिन में भी नींद या आराम की जरुरत महसूस होती है।
3 सूजन - जब दिल को शरीर के सभी आंतरिक अंगों में रक्त पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, तो शिराएं फूल जाती हैं और उनमें सूजन आने की संभावना बढ़ जाती है। इसका असर खास तौर से पैर के पंजे, टखने और अन्य हिस्से में सूजन के रूप में नजर आने लगता है। इसके कभी-कभी होंठों की सतह पर नीला होना भी इसमें शामिल है।
4 सर्दी का बना रहना - लंबे समय तक सर्दी या इससे संबंधित लक्षणों का बना रहना भी दिल के दौरे की ओर इशारा करता है। जब दिल, शरीर के आंतरिक अंगों में रक्तसंचार के लिए ज्यादा मेहनत करता है, तब रक्त के फेफड़ों में स्त्रावित होने की संभावना बढ़ जाती है। सर्दी में कफ के साथ सफेद या गुलाबी रंग का बलगम, फेफड़ों में स्त्रावित होने वाले रक्त के कारण हो सकता है।
5 चक्कर आना - जब आपका दिल कमजोर हो जाता है, तो उसके द्वारा होने वाला रक्त का संचार भी सीमित हो जाता है। ऐसे में दिमाग तक आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे निरंतर चक्कर आना या सिर हल्का होना जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यह हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार एक गंभीर लक्षण है, जिस पर आपको तुरंत ध्यान देना चाहिए।
6 इनके अलावा सांस लेने में अगर आपको किसी प्रकार का परिवर्तन या कमी का एहसास होता है, तो यह भी दिल के दौरे का लक्षण हो सकता है। जब दिल अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाता तो फेफड़ों तक उतनी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती जितनी आवश्यकता होती है। इस वजह से सांस लेने में कठिनाई होती है। अगर आपके साथ भी ऐसा ही कुछ होता है, तो बगैर देर किए डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
देश में हर साल होने वाली असमय मौतों में लगभग 50 प्रतिशत मौतें बगैर लक्षण वाले दिल के दौरों के कारण होती हैं. यह जानकारी एक हृदय रोग विशेषज्ञ ने यहां दी है. यहां स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हृदयरोग विभाग के अध्यक्ष और निदेशक, डॉ. नवीन भामरी ने एक बयान में कहा है, देश में हर साल हृदय रोगों और यहां तक कि समयपूर्व मौत के लगभग 45-50 प्रतिशत मामलों के लिए बगैर लक्षण वाले दिल के दौरों को जिम्मेदार पाया गया है, जिसे चिकित्सा शब्दावली में असिम्टोमैटिक हार्ट अटैक कहा जाता है.
डॉ. भामरी ने कहा, एसएमआई का सामना करने वाले मध्यम आयु वर्ग के लोगों में ऐसी घटनाएं महिलाओं की तुलना में पुरुषों में दोगुना होने की आशंका होती है. वास्तविक दिल के दौरे की तुलना में एसएमआई के लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए इसे मूक हत्यारा कहा गया है.
उन्होंने कहा, सामान्य दिल के दौरे में छाती में तेज दर्द, बाहों, गर्दन और जबड़े में तेज दर्द, अचानक सांस लेने में परेषानी, पसीना और चक्कर आना, जैसे लक्षण होते हैं. जबकि इसके विपरीत एसएमआई के लक्षण बहुत कम और हल्के होते हैं, और इसलिए इसे लेकर भ्रम हो जाता है और लोग इसे नियमित रूप से होने वाली परेशानी मानकर इसे अक्सर अनदेखा कर देते हैं. इसके लिए अधिक उम्र, पारिवारिक इतिहास, धूम्रपान या तंबाकू चबाना, उच्च रक्त चाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, वजन संबंधित समस्याएं, शारीरिक गतिविधि की कमी जिम्मेदार हो सकते हैं.
डॉ. भामरी के अनुसार, मध्यम आयु वर्ग के लोगों (पुरुषों और महिलाओं दोनों) का धूम्रपान करना और शराब पर बढ़ती निर्भरता असमय दिल की समस्याओं के लिए जिम्मेदार है. आरामतलब जीवनशैली, खाने की खराब आदतें और शारीरिक गतिविधि की कमी का मोटापे से संबंध है और इससे दिल की समस्याएं पैदा होती हैं. अब युवा पीढ़ी में भी दिल से संबंधित ये बीमारियां बढ़ रही हैं.
उन्होंने कहा, किसी भी रोगी को हमेशा एसएमआई से जुड़ी दो जटिलताओं- कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) और सडन कार्डियक डेथ (एससीडी) से अवगत होना चाहिए. उपचार का उद्देश्य दवाइयों, स्टेंट का उपयोग कर रिवैस्कुलराइजेशन और यहां तक कि बाईपास सर्जरी की मदद से इस्कीमिया, हार्ट फेल्योर और कार्डियक एरीथमिया के कारण होने वाली मृत्यु को रोकना है.
डॉ. भामरी का कहना है, डॉक्टर स्ट्रेस टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं, जिससे दो उद्देश्य हल हो सकते हैं. इससे डॉक्टर को व्यायाम की सीमा को मापने में मदद मिलती है, जो इस्कीमिया पैदा कर सकता है और डॉक्टर सबसे सुरक्षित गतिविधियों से संबंधित विशिष्ट निर्देश दे सकते हैं.
आजकल अधिकतर लोग हार्ट अटैक की बीमारी से पीड़ित हैं. यूं तो हार्ट अटैक होने से पहले ही इससे जुड़े कई लक्षण दिख जाते हैं. लेकिन अब कई लोगों को अचानक हार्ट अटैक हो रहा है और ये लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है.
हार्ट अटैक कभी भी अचानक अाा सकता हैै, लेकिन कुछ लक्षण हैं, जो हार्ट अटैक के 1 महीने पहले नजर आने लगते हैं। अगर आपको भी नजर आते हैं यह 6 लक्षण तो सावधान हो जाएं, क्योंकि आप हार्ट अटैक के शिकार हो सकते हैं। अभी जानिए इन लक्षणों को, ताकि हार्ट अटैक से बचा जा सके-
6 लक्षण दिखें, तो आने वाला है हार्ट अटैक
1 सीने में असहजता - यह दिल के दौरे के लिए जिम्मेदार लक्षणों में से एक है। सीने में होने वाली किसी भी प्रकार की असहजता आपको दिल के दौरे का शिकार बना सकती है। खास तौर से सीने में दबाव या जलन महसूस होना। इसके अलावा भी अगर आपको सीने में कुछ परिवर्तन या असहजता का अनुभव हो, तो तुरंत अपने चिकित्सक से सलाह लें।
2 थकान - बगैर किसी मेहनत या काम के थकान होना भी हार्ट अटैक की दस्तक हो सकती है। जब हृदय धमनियां कोलेस्ट्रॉल के कारण बंद या संकुचित हो जाती हैं, तब दिल को अधिक मेहनत करने की आवश्यकता होती है, जिससे जल्द ही थकान महसूस होने लगती है। ऐसी स्थिति में कई बार रात में अच्छी खासी नींद लेने के बाद भी आप आलस और थकान का अनुभव करते हैं, और आपको दिन में भी नींद या आराम की जरुरत महसूस होती है।
3 सूजन - जब दिल को शरीर के सभी आंतरिक अंगों में रक्त पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, तो शिराएं फूल जाती हैं और उनमें सूजन आने की संभावना बढ़ जाती है। इसका असर खास तौर से पैर के पंजे, टखने और अन्य हिस्से में सूजन के रूप में नजर आने लगता है। इसके कभी-कभी होंठों की सतह पर नीला होना भी इसमें शामिल है।
4 सर्दी का बना रहना - लंबे समय तक सर्दी या इससे संबंधित लक्षणों का बना रहना भी दिल के दौरे की ओर इशारा करता है। जब दिल, शरीर के आंतरिक अंगों में रक्तसंचार के लिए ज्यादा मेहनत करता है, तब रक्त के फेफड़ों में स्त्रावित होने की संभावना बढ़ जाती है। सर्दी में कफ के साथ सफेद या गुलाबी रंग का बलगम, फेफड़ों में स्त्रावित होने वाले रक्त के कारण हो सकता है।
5 चक्कर आना - जब आपका दिल कमजोर हो जाता है, तो उसके द्वारा होने वाला रक्त का संचार भी सीमित हो जाता है। ऐसे में दिमाग तक आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे निरंतर चक्कर आना या सिर हल्का होना जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यह हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार एक गंभीर लक्षण है, जिस पर आपको तुरंत ध्यान देना चाहिए।
6 इनके अलावा सांस लेने में अगर आपको किसी प्रकार का परिवर्तन या कमी का एहसास होता है, तो यह भी दिल के दौरे का लक्षण हो सकता है। जब दिल अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाता तो फेफड़ों तक उतनी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती जितनी आवश्यकता होती है। इस वजह से सांस लेने में कठिनाई होती है। अगर आपके साथ भी ऐसा ही कुछ होता है, तो बगैर देर किए डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
देश में हर साल होने वाली असमय मौतों में लगभग 50 प्रतिशत मौतें बगैर लक्षण वाले दिल के दौरों के कारण होती हैं. यह जानकारी एक हृदय रोग विशेषज्ञ ने यहां दी है. यहां स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हृदयरोग विभाग के अध्यक्ष और निदेशक, डॉ. नवीन भामरी ने एक बयान में कहा है, देश में हर साल हृदय रोगों और यहां तक कि समयपूर्व मौत के लगभग 45-50 प्रतिशत मामलों के लिए बगैर लक्षण वाले दिल के दौरों को जिम्मेदार पाया गया है, जिसे चिकित्सा शब्दावली में असिम्टोमैटिक हार्ट अटैक कहा जाता है.
डॉ. भामरी ने कहा, एसएमआई का सामना करने वाले मध्यम आयु वर्ग के लोगों में ऐसी घटनाएं महिलाओं की तुलना में पुरुषों में दोगुना होने की आशंका होती है. वास्तविक दिल के दौरे की तुलना में एसएमआई के लक्षण बहुत हल्के होते हैं, इसलिए इसे मूक हत्यारा कहा गया है.
उन्होंने कहा, सामान्य दिल के दौरे में छाती में तेज दर्द, बाहों, गर्दन और जबड़े में तेज दर्द, अचानक सांस लेने में परेषानी, पसीना और चक्कर आना, जैसे लक्षण होते हैं. जबकि इसके विपरीत एसएमआई के लक्षण बहुत कम और हल्के होते हैं, और इसलिए इसे लेकर भ्रम हो जाता है और लोग इसे नियमित रूप से होने वाली परेशानी मानकर इसे अक्सर अनदेखा कर देते हैं. इसके लिए अधिक उम्र, पारिवारिक इतिहास, धूम्रपान या तंबाकू चबाना, उच्च रक्त चाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, वजन संबंधित समस्याएं, शारीरिक गतिविधि की कमी जिम्मेदार हो सकते हैं.
डॉ. भामरी के अनुसार, मध्यम आयु वर्ग के लोगों (पुरुषों और महिलाओं दोनों) का धूम्रपान करना और शराब पर बढ़ती निर्भरता असमय दिल की समस्याओं के लिए जिम्मेदार है. आरामतलब जीवनशैली, खाने की खराब आदतें और शारीरिक गतिविधि की कमी का मोटापे से संबंध है और इससे दिल की समस्याएं पैदा होती हैं. अब युवा पीढ़ी में भी दिल से संबंधित ये बीमारियां बढ़ रही हैं.
उन्होंने कहा, किसी भी रोगी को हमेशा एसएमआई से जुड़ी दो जटिलताओं- कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) और सडन कार्डियक डेथ (एससीडी) से अवगत होना चाहिए. उपचार का उद्देश्य दवाइयों, स्टेंट का उपयोग कर रिवैस्कुलराइजेशन और यहां तक कि बाईपास सर्जरी की मदद से इस्कीमिया, हार्ट फेल्योर और कार्डियक एरीथमिया के कारण होने वाली मृत्यु को रोकना है.
डॉ. भामरी का कहना है, डॉक्टर स्ट्रेस टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं, जिससे दो उद्देश्य हल हो सकते हैं. इससे डॉक्टर को व्यायाम की सीमा को मापने में मदद मिलती है, जो इस्कीमिया पैदा कर सकता है और डॉक्टर सबसे सुरक्षित गतिविधियों से संबंधित विशिष्ट निर्देश दे सकते हैं.


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