जीवन मंत्र डेस्क. कोलकाता का सेंट पॉल कैथेड्रल चर्च एशिया का पहला ऐसा चर्च था जो किसी संत के नाम पर बनाया गया था। इसलिए इसे एशिया का पहला एपिस्कोपल चर्च कहा जाता है। चर्च के अंदरूनी हिस्से में पवित्र कर्मों का चित्रण किया गया है। ये भारत के महत्वपूर्ण चर्च में से एक माना जाता है। करीब 171 साल पहले इस चर्च को इसको बनाने मेंलगभग 4.35 लाख रुपए खर्च हुए थे। इस चर्च में एकसाथ करीब 1000 लोग प्रार्थना में शामिल हो सकते हैं।
- सेंट पॉल कैथेड्रल चर्च गोथिक कला का बेजोड़ नमूना माना जाता है। इसकी आधारशिला 1839 में रखी गई थी और साल 1847 में निर्माण कार्य संपन्न हुआ था। इसे एशिया में पहला एपिस्कोपल चर्च का तमगा हासिल है। यह चर्च उन सबसे बेहतरीन इमारतों में से एक है, जिन्हें गोथिक शैली में बनाया गया है। इस चर्च का निर्माण कोलकाता में यूरोप के लोगों की बढ़ती जनसंख्या को देखकर शुरू किया गया था क्योंकि उस समय मौजूद सेंट जॉन चर्च छोटा पड़ने लगा था। यह चर्च कुछ-कुछ इंग्लैंड के नॉर्विच कैथेड्रल की तरह प्रतीत होता है। यह दो बार भूकंप की वजह से ध्वस्त भी हो चुका है, जिसे फिर से बनाकर संरक्षित किया गया है।
- रानी विक्टोरिया ने भेजीं थीं चांदी की प्लेटें
यह चर्च 7 एकड़ के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इसके शुभांरभ के अवसर पर रानी विक्टोरिया ने चर्च के लिए चांदी की 10 प्लेटें भेजी थीं। इसका शिखर 201 फीट ऊंचा है। यहां बिशप हेबर की मूर्ति विशेष आकर्षण का केंद्र है। हेबर कोलकाता के दूसरे बिशप थे। इस पवित्र स्थान के दर्शन के लिए विश्वभर से हजारों की संख्या में लोग दर्शन के लिए आते हैं।
- बनाया गया है ध्यान क्रेंद्र
इसका डिजाइन प्रसिद्ध अंग्रेजी वास्तुकार मेजर डब्ल्यू एन फोर्बेस द्वारा तैयार किया गया था। यह ऐतिहासिक चर्च कला का एक खूबसूरत नमूना है। इसमें पतले सीधे खड़े खम्भे, मेहराब और समभार सहारे सुसज्जित हैं। चर्च के अंदरूनी हिस्से में प्रार्थना स्थल के अलावा कई अन्य पवित्र स्थान मौजूद हैं, जहां पवित्र कर्मों का चित्रण किया गया है। चर्च के अंदर का माहौल बड़ा ही सुखद है। यह आपको शोर-शराबों से अलग एक सुखी और शांत वातावरण का अनुभव प्रदान करता है।
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source https://www.bhaskar.com/religion/dharam/news/christmas-st-pauls-cathedral-church-is-around-171-years-old-in-kolkata-its-built-on-7-acres-126361701.html
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