जीवन मंत्र डेस्क. तमिलनाडु अलग-अलग तरह के मंदिरों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। इन्हीं में से एक नवग्रह मंदिरों की श्रंखला भी यहां की विशेषता है। हर ग्रह के लिए एक अलग मंदिर है। लोग अपने ग्रह दोषों की शांति के लिए यहां आते हैं। ऐसा ही एक मंदिर है देवगुरु बृहस्पति का। तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले से 38 किमी दूर गांव है अलंगुड़ी। यहां श्री आपत्सहायेश्वर महादेव का मंदिर है। लोक मान्यता है कि ये वही स्थान है जहां भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष पीया था।
इसी कारण यहां महादेव का नाम आपत्सहायेश्वर है। अर्थ है जो आपत्ति में सहायक हो। इसी मंदिर में भगवान बृहस्पति की प्रतिमा मौजूद है। इन्हें गुरु भगवान बृहस्पति दक्षिणमूर्ति कहा जाता है। यहां लोग कुंडली के ग्रह दोषों की शांति के लिए मंदिर की 24 परिक्रमा करते है, 24 बत्तियों वाला दीपक भी लगाते हैं।
तिरुविरूर से 38 किमी दूर स्थित गांव अलंगुड़ी के बारे में कहा जाता है कि इस गांव की रचना भी समुद्र मंथन के दौरान हुई थी। देवताओं और दानवों ने जब अमृत प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया था तो सबसे पहले हलाहल विष निकला। उससे सभी लोग डरकर भागने लगे। मारे जाने लगे। तब देवताओं ने भगवान शिव से याचना की। यहां भगवान शिव ने हलाहल विष को पीकर अपने कंठ में रख लिया था। आपत्सहायेश्वर महादेव में ही देवगुरु बृहस्पति का भवन भी मौजूद है।
पूरे तमिलनाडु में अलग-अलग स्थानों पर शनि, मंगल, गुरु, सूर्य, बुध, शुक्र, चंद्र, राहु और केतु के मंदिर हैं। आपत्सहायेश्वर मंदिर में बृहस्पति की शांति और प्रसन्नता के लिए बड़ी संख्या में लोग हर दिन आते हैं। खासतौर पर गुरुवार को यहां विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। लोग मंदिर की 24 परिक्रमा करते हैं। यहां भगवान के सामने 24 बत्तियों वाला दीपक जलाया जाता है। इसको लेकर मान्यता है कि इससे कुंडली के गुरु जनित दोष दूर होते हैं, गुरु ग्रह का शुभ फल मिलने लगता है।
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source https://www.bhaskar.com/religion/dharam/news/devguru-brihaspati-temple-in-alangudi-24-circumambulation-tradition-here-to-remove-horoscope-defects-126905292.html
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